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अहोई अष्टमी कि कहानी

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अहोई अष्टमी कि कहानी Ahoyi astami ki kahani यह त्योहार  कार्तिक पक्ष कि अष्टमी को मनाया जाता है।इस दिन बच्चो कि मा पूरे दिन व्रत रखती है। इस दिन सांयकाल तारे निकलने के बाद दीवाल पर अहोई बना कर उसकीहपूजा करें।व्रत रखने वाली माताए कहानी सुने। यह व्रत  बच्चो के कल्याण के लिए किया जाता है। अहोई  देवी के चित्र के साथ-साथ सेही और सेही के बच्चे के चित्र भी बनावें और पूजा  करें। धन तेरस कि कहानी   <<<<ये भी पढ़े।  अहोई अष्टमी कि कहानी बहुत पुराने समय कि बात है। भारत वर्ष के दतिया नामक नगरमें चन्द्रभान नाम का एक साहुकार रहता था। उसकि पत्नी का नाम चन्द्रिका था। वह बहुत ही गुणवान, रुपवती,चरित्रवान और पवित्र थी। उसके कई.पुत्र व पुत्रिया हुई। परन्तु वे सब कि सब छोटी उम्र में ही यमलोक को चले गये। संतान के इस तरह मर जाने से  दोनो दुखी रहते थे।वे पति पत्नि मन हि मन सोचा करते थे हमारे मरने.के बाद इस वैभव का कौन अधिकारी होगा।  एक दिन उन दोनो ने निश्चय किया कि सब धन दौलत को त्याग कर जंगल में निवास किया जाय । ऐसा निश्चय कर दूसरे दिन हि दोनो ...

मोटापा कम करने के उपाय/vet loss tips

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मोटापा कम करने के उपाय/vet loss tips मोटापा कम करने करने के उपाय मोटा होना आज के समय में बहुत हि शर्म कि बात समझी जाती हैं।मोटापे को कम करने के लिय हम दवाइयो का भी सेवन करते हैं लेकिन इनका असर कुछ दिनो तक रहता है और मोटापा वापस बढ़ने लग जाता है ।इसलिय मोटापे को आयुर्वेदिक /घरेलु उपचार अपना कर कम किया जा सकता है। मोटापे का कारण मोटापे के कई कारण है जिनकि जानकारी होय बिना मोटापे को कम नहि किया जा सकता हैं जो कि निम्न है:- 1.अत्यधिक कैलेरी युक्त भोजन करने से मोटापा अधिक बढ़ता है। 2.आवश्कता से अधिक खाना खाने से भी मोटापा बढ़ता है। 3.अनियमित दिनचर्या के कारण भी मोटापा बढ़ता है। 4.रात को देर तक न सोना सुबह निन्द पुरी नहोने से  व्यक्ति मोटापे का शिकार होता है। 5.अनुवांशिकता भी मोटापे का कारण हो सकता हैं । 6.कम शारिरीक परिश्रम भी मोटापे का कारण होता हैं। 7.अत्यधिक चिन्ता ,तनाव, के कारण भी मोटापा बढ़ता है। 8.दवाइयो अत्यधिक सेवन से के साइडइफेक्ट से मोटापा बढ़ता है। 9.चाय ,कोफि  के अत्यधिक सेवन से भी मोटापा बढा़ सकता हैं। मोटापा कम करने के घरेलु उपाय मोटापे कारण जानन...

शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद/संज्ञा

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शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद रुप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर  शब्दो  के दो  भेद होते है :- 1.विकारी 2.अविकारी 1.विकारीः-           १.   विकारी  शब्द  लिंग वचन,  काल ,  पुरुष  , कारक , आदि के कारण परिवर्तन होते है।यानि विकृत होते हैं। २. विकारी शब्दो का रूप परिवर्तन हो जाता हैं। जैसेः- छात्र, वह, अच्छा, पढ़ना * विकारी शब्दो के चार भेद होते हैं। 1. संज्ञा 2.सर्वनाम 3.विशेषण 4.क्रिया 2. अविकारी शब्द(अव्यय) अविकारी शब्द भिन्न -2 वाक्यों में प्रयुक्त किये जाने परभी अन्य पदो के लिंग ,वचन आदि से विकृत या परिवर्तन नहि होते हैं। जैसेः- दूर, से दूर,और, अरे! *अव्यय चार प्रकार के होते है। 1.क्रिया विशेषण 2.संबंधसुचक 3.समुच्चय सूचक 4.विस्मयादि बोध संज्ञा किसे कहते है? संज्ञा शब्द भेद/संज्ञा (नाम) सम् (उपसर्ग)+ज्ञा(धातु) किसी भी वस्तु के नाम को  संज्ञा  कहा जाता है।और वस्तु वह जो या तो विद्यमान है या फिर जिसके विद...

कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार

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कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार कारक /कारक का अर्थ और प्रकार कारक का अर्थः- कारक  का शाब्दिक अर्थ है-क्रिया को सम्पन और निष्पादित करने वाला। उदाहरणः- * हरि श्याम को पुस्तक देता है।    (सम्प्रदान कारक) * हरि को विध्यालय जाना था।     (कर्ता कारक) * उसने मुझे पिटा।               (कर्म कारक) * हरि के द्वारा पुस्तक पढी गई।    ( कर्ता कारक) *पुजारी कुत्तो से डरता है।     (आपादान कारक) * तुम कहाँ जा रहे हो।        ( कर्ता कारक) 👉 संज्ञा या सर्वनाम  का वह रूप जो वाक्य में प्रयुक्त क्रिया (मुख्यतः) या अन्य पदो के साथ सम्बन्ध सुचित करे कारक कहलाता है।     अर्थात संज्ञा या सर्वनाम के भिन्न -भिन्न रुप कारक कहे जा सकते है। जैसेः-          छात्र ने    (उसको)          छात्र को   (उस को)          छात्र से    (उस से) 👉कर्ता के आठ भेद होते है:-...

Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी

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Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी धन तेरस कि कहानी धन तेरस का त्योहार दिवाली आने के एक दिन पूर्व मनाया जाता है ।इस दिन सामान या सोने चाँदी कि चिजे खरीदना साभ माना जाता है।यह कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है।    इस दिन घर में लक्ष्मी का आवास मानते हैं।इस दिन धनवन्तरि वैध्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुय थे।इसलिय धनतेरस कोधनवन्तरी-जयन्ति भी कहते है। Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी धन तेरस कि कहानी एक बार भगवान विष्णु मृत्यु लोक विचरण करने के लिय लक्ष्मी सहित भूमण्डल पर आये थे।कुछ देर बाद भगवान विष्णु लक्ष्मी से बोले में दक्षिण दिशा कि ओर जा रहा हू तुम वहा पर मत देखना।यह कहकर भगवान ने राह पकडी लक्ष्मी उनके पिछे-पिछे चल पड़ी।कुछ हि देर में सरसो का खेत दिखाई दिया,उसके बाद उख का खेत दिखाई दिया।।वही लक्ष्मी जी ने श्रंगार किया और उख तोड़कर चूसने लगी।        उसी क्षण भगवान वहा लोटे यह सब देखकर लक्ष्मी जी को शाप दिया।कि जिस किसान का यह खेत हैतुम यहा१३वर्ष तक नोकरी करोगी।       येसा कहकर भगवान क्ष...

करवा चौथ कि कहानी/kahani/अध्यात्मिक कहानी

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करवा चौथ कि कहानी करवा चोथ कि कहानी गोवर्धन पूजा कि कहानी करवा-चोथ  का व्रत हिन्दूओ का महत्त्व पूर्ण त्योहार है। इस दिन सभी सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति कि लम्बि उम्र के लिय व्रत रखती है ।ये त्योहार भारत के कई राज्यो राजस्थान  ,हरियाणा, पंजाब, गुजरात,उतर प्रदेश आदि राज्यो का महत्वपूण त्योहार है। करवा चोथ कि कहानी   ये व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष को चन्द्रोदयव्यापिनी ४ में किया जाता है। सौभाग्यवति स्त्रियां स्वपति की रक्षार्थ यह व्रत करती हैं। तथा रात्रि को शिव,चन्द्रमा, स्वामि कार्तिकेय आदि के चित्रो एवं सुहाग की वस्तुओं कि पूजा करती हैं।पहले चन्द्रमा उसके नीचे शिव तथा कार्तिके आदिके चित्र पर दीवाल के पीसे एपन से बनाना चा हिए।इस दिन निर्जल व्रत करे ।चन्द्र अर्ध्य देकर भोजन करना चाहिए।कोइ  कोई स्त्रिया चीनी  या मिट्टी का करवा आदान प्रदान करती हैं। कहानी करवा चोथ कि कहानी एक बार पाण्डु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर चले गये ।इधर पाण्डवो पर अनेक विपत्तियाँ पहले से हि व्याप्त थी।इससे द्रौपदी ने शोकाकुल हो कृष्ण का ध्यान किया भगव...

गोवर्धन- पूजा की कहानी/अन्नकुट कि कहानी

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गोवर्धन - पूजा कि कहानी गोवर्धन पर्वत कि कहानी गोवर्धन पर्वत कि कहानी  एक दिन भगवान कृष्ण  ने देखा कि पूरे ब्रज में तरह -तरह के मिष्ठान  तथा पकवान बनाये जा रहे हैं।पूछने पर ज्ञात हुआ कि वृषासुर संहारक ,मेध देवता ,देवराज इन्द्रकी पूजा के लिए तैयारु हो रही हैं।इन्द्र कि प्रसन्नता से हि वर्षा होती हैं। रुप चतुर्दशी कि कहानी <<<ये भी पढ़े। गायो को चारा मिलेगा तथा जिविकोपार्जन कि समस्या हल होगी। गोवर्धन पर्वत कि कहानी      यह सुन कर भगवान ने श्री कृष्ण ने इन्द्र कि निन्दा करते हुए कहा कि उस देवता कि पूजा करनी चाहिए जो प्रत्यक्ष आकर पूजन सामग्री स्विकार करे।यह सुनकर गोपो ने कहा कि कोटी -2 देवताओ के राजा कि इस तरह से निन्दा नही करनी चाहिये।तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि इन्द्र कि क्या शक्ति है जो वर्षा करे हमारी सहायता करे।          पूजा तो उस  गोवर्धन पर्वत  कि पुजा करनी चाहिए जो शक्तिशाली और सुन्दर है जो वर्षा का मूल स्रोत हैं।श्री कृष्ण के वाग्जाल में फंसकर सभी ब्रजवासियो नज घर के अन्दर जाक...