शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद/संज्ञा

शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद

रुप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के दो भेद होते है :-

1.विकारी

2.अविकारी

1.विकारीः-

          १.   विकारी शब्द लिंग वचन, कालपुरुष ,कारक, आदि के कारण परिवर्तन होते है।यानि विकृत होते हैं।
२. विकारी शब्दो का रूप परिवर्तन हो जाता हैं।
जैसेः-
छात्र, वह, अच्छा, पढ़ना

* विकारी शब्दो के चार भेद होते हैं।

1. संज्ञा
2.सर्वनाम
3.विशेषण
4.क्रिया


2. अविकारी शब्द(अव्यय)


अविकारी शब्द भिन्न -2 वाक्यों में प्रयुक्त किये जाने परभी अन्य पदो के लिंग ,वचन आदि से विकृत या परिवर्तन नहि होते हैं।
जैसेः-
दूर, से दूर,और, अरे!

*अव्यय चार प्रकार के होते है।

1.क्रिया विशेषण
2.संबंधसुचक
3.समुच्चय सूचक
4.विस्मयादि बोध

संज्ञा किसे कहते है?

संज्ञा

शब्द भेद/संज्ञा
शब्द भेद/संज्ञा


(नाम)
सम् (उपसर्ग)+ज्ञा(धातु)
किसी भी वस्तु के नाम को संज्ञा कहा जाता है।और वस्तु वह जो या तो विद्यमान है या फिर जिसके विद्यमान होने कि कल्पना कि जा सकती हैं।

संज्ञा के प्रमुख तीन भेद होते हैं-

(1) व्यक्ति वाचक(एक)
(2)जाति वाचक(समूह)
(3)भाव वाचक (जिसे देखा ना जा सके)

(1)व्यक्ति वाचक संज्ञाः-

ऐसे नाम जो केवल किसी विशेष या एक हि वस्तु का बोध कराए व्यक्ति वाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसेः-
राजस्थान ,जयपूर,भारत,विन्ध्याचल,ऐवरेस्ट,गुरू शिखर,चेतक,कामधेनु,ऐरावत,कुलिश,महाभारत,सीता,राम,गंगा,हवामहल,लाल किला।

(2) जाति वाचक संज्ञाः-

ऐसे नाम जो किसी जाति या समुह का बोध कराए जाति वाचक संज्ञा कहलाती हैं। अर्थात अनेक वस्तुओ का बोध कराने वाले नाम जाति वाचक संज्ञा होती हैं।
जैसेः-
   राज्य ,शहर,देश,पर्वत, चोटी,घोडा़ गाय,हाथी, ब्रज,ग्रंथ ,स्त्रि, पुरुष, नदि, महल,मीन्नार,किला।

भवन,धनुष,विद्यालय,हाथ,पुत्र,हार,मंत्री,वायु, राष्ट्रपति,जल,फल।

* जाति वाचक संज्ञा में निम्नलिखित को शामिल किया जाता है-

1. द्रव्य कि तीनो अवस्थाओ के नाम

जैसे-
     अनाज,मिट्टी,बर्फ,वायु,हवा,जल,पानी,तेल,धी आदि।

2.खनिज वस्तुओ के नाम-

जैसे-
    सोना ,चाँदी,अभ्रक,आदि।

3.शरीर के अंगो के नाम-

 जैस- हाथ ,कान,नाक, साँस,ललाट,,बाल आदि।

4.आभूषणो के नाम-

जैसे-  हार,बाजूबन्द,तिमणिया,रखड़ी,जुड़ामणि।

5.रिस्तो नातो के नाम-

जैसे-मित्र,माता-पिता,सहेली।

6.पद का नाम-

जैसे-अध्यापक,मंत्री,राष्ट्रपत्ति,

7.किसी भी पद का बहुबचन रुप-

जैसे-अच्छाइया,भावनाय,जयचन्दो,दुरियो,अच्छो।
8.यदि किसी व्यक्ति वाचक संज्ञा शब्द को किसी का गुण या विशेषता या उपमा,देने के लिय किय जाते है तो वह शब्द जाति वाचक संज्ञा बन जाता हैं।
जैसे- 1.वह तो जयचन्द निकला।
       2.कालिदास भारत का शैक्सपियर है।
        3.उदयपुर राजस्थान का कश्मिर है।
  नोट-कुछ जाति वाचकसंज्ञा शब्द भी व्यक्ति वाचक संज्ञा बन जाते है ।
जैसे-  नेताजी वायु दुर्धटना में मारे गये।
बापू ने भारत को आजाद कराया।
  
     ऑक्सीजन,हरिद्रा,सेब, पीपल,व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण हैं।

* जाति वाचक संज्ञा के भी दो भेद होते है-

(1) द्रव्य वाचक(अगणनिय) -

जल,पानी,दूध,घी,तेल ,अनाज,मिट्टी इनको द्रव्य वाचक संज्ञा कहते है ।

(2) समूह वाचक-

जनता ,भीड़,लोग,परिवार,कुटुम्ब,समुदाय,समाज,समुह,जथा,रेवड़,दल,टोली,सेना,पुलिस,गिरोह।

3.भाव वाचक संज्ञा-

 भाव वाचक संज्ञा में निम्नलिखित को शामिल किया जाता हैं-
(1)भाव का नाम- 
क्रोध,प्रेम,प्यार,स्नेह,वात्सल्य,इर्ष्या,भुख,दुख, मद्,लोभ,लालच।
(2)गुण का नाम- 
चतुराई,भलाई,बुराई,सुन्दरता,कुरूपता,बेइमानी, इमानदारी,मुर्खता।
(3)अवस्था या दशा का नाम-
बुड़ापा,बचपन,यौवन,तारूण्य,वार्धक्य,वृद्धा अवस्था, रुग्णता।

* भाव वाचक संज्ञा के दो भेद होते है-

(1)मूल भाव(रूढ़)वाचक संज्ञा
(2)योगिक(व्युत्पन्न)

(1)मूल भाव वाचक संज्ञा-

 यह शब्द प्रत्यय या दो शब्दो या शब्दांशो से मिलकर नहि बने हुय होते हैं।
जैसे- जन्म,मृत्यु,सुख,दुख,ईर्ष्या,धृणा,प्रेम,स्नेह,आदि।

(2)योगिक(व्युत्पन्न)

निम्नलिखित प्रत्ययो से योगिक भाववाचक संज्ञा शब्दो का निर्माण किया जा सकता हैं-
आई,त्ता,य, त्व,आवा,इमा,आट,आपा,आस,पन,आवट,(ई)(अ),अन्,अत,अंत।
नोट- संज्ञा का चोथा भेद भी होता है
क्रियार्थकसंज्ञा-
ऐसे क्रिया शब्द जो विक्य प्रारम्भ में प्रयुक्त होकर संज्ञा का कार्य करने लगे। क्रियार्थक संज्ञा कहलाती है।
जैसे- हँसना स्वास्थ्य केलिए लाभदायक है।
हँसना भाव वाचक संज्ञा है।


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