अहोई अष्टमी कि कहानी
अहोई अष्टमी कि कहानी Ahoyi astami ki kahani यह त्योहार कार्तिक पक्ष कि अष्टमी को मनाया जाता है।इस दिन बच्चो कि मा पूरे दिन व्रत रखती है। इस दिन सांयकाल तारे निकलने के बाद दीवाल पर अहोई बना कर उसकीहपूजा करें।व्रत रखने वाली माताए कहानी सुने। यह व्रत बच्चो के कल्याण के लिए किया जाता है। अहोई देवी के चित्र के साथ-साथ सेही और सेही के बच्चे के चित्र भी बनावें और पूजा करें। धन तेरस कि कहानी <<<<ये भी पढ़े। अहोई अष्टमी कि कहानी बहुत पुराने समय कि बात है। भारत वर्ष के दतिया नामक नगरमें चन्द्रभान नाम का एक साहुकार रहता था। उसकि पत्नी का नाम चन्द्रिका था। वह बहुत ही गुणवान, रुपवती,चरित्रवान और पवित्र थी। उसके कई.पुत्र व पुत्रिया हुई। परन्तु वे सब कि सब छोटी उम्र में ही यमलोक को चले गये। संतान के इस तरह मर जाने से दोनो दुखी रहते थे।वे पति पत्नि मन हि मन सोचा करते थे हमारे मरने.के बाद इस वैभव का कौन अधिकारी होगा। एक दिन उन दोनो ने निश्चय किया कि सब धन दौलत को त्याग कर जंगल में निवास किया जाय । ऐसा निश्चय कर दूसरे दिन हि दोनो ...