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स्वर संधि,दीर्ध संधि/हिन्दी/हिन्दी व्याकरण

स्वर संधि संधि विच्छेद स्वरो के परस्पर मेंल में उत्पन ध्वनि विकारो को  स्वर संधि कहते है। स्वरो कि जातियता और  भिन्नता के आधार के आधार पर स्वर संधि के 5उप भेद है 1.दीर्ध स्वर संधि 2.गुण स्वर संधि 3.वृध्दि स्वर संधि 4.यण स्वर संधि 5.अयाधि स्वर संधि स्वर और व्यंजन    हिन्दी में मूलतः 11स्वर माने गए है।इसमें'अ' ,'इ' ,'उ' ,तथा 'ऋ' चार मूल स्वर है। मूल स्वरो को.हृस्व स्वर भी कहा जाता  है। शेष 7स्वर संयूक्त स्वर माने जाते है। स्वर संधि के प्रकार 1.दीर्घ संधि अ/आ/+अ/आ     =आ इ/ई   +इ/ई          =ई उ/ऊ+उ/ऊ           =ऊ   जब दो समान स्वर अथवा एक हि स्वर के दो रूप हृस्व व दीर्ध, मिलते हैं तो दीर्घ स्वर बनता है- अ/आ+अ/आ=    आ पुरुष +अर्थ = पुरूषार्थ परम+अर्थ=    परमार्थ स्व   +अर्थ =स्वार्थ स्व  +अधीन=स्वाधिन पर+  अधीन=पराधीन शास्त्र+अर्थ=शास्त्रास्त्र परम+अणु=परमाणु वेद+ अन्त=वेदान्त अधिक+अंश=अधिकांश गव   +अक्ष=गवाक्ष सुषुप्त+...