वाच्य/हिन्दी व्याकरण
वाच्य/हिन्दी व्याकरण वाच्य ओर उसके भेद क्रिया का वह रुप जो कर्ता , कर्म या भाव कि प्रधानता सूचित करता हो वाच्य कहलाता है अर्थात किसी भी वाक्यय में कर्ता कि प्रधानता है या कर्म कि प्रधानता है या फिर क्रिया कि प्रधानता है। यह सुचित करना हि वाच्य है। हिन्दी में वाच्य तीन होता हैं- 1.कर्तृ वाच्य 2.कर्म वाच्य 3.भाव वाच्य 1.कृर्तृ वाच्य- १.कर्ता कि प्रधानता होती हैं। २.अकर्मक व सकर्मक दोनो प्रकार कि क्रियाओ का प्रयोग हो सकता है। ३.कर्ता के साथ ने या शून्य कारक चिन्ह का प्रयोग होता हैं। ४.यदि किसी वाक्य में कर्ता न हो (आज्ञार्थक वाक्य) तो उस वाक्य में आप या तुम शब्द का प्रयोग करके पुनः लिखने पर भी इनके कोई भी कारक चिन्ह न आये तो उस उस वाक्य में कृर्तृ वाच्य होता है। जेसे- 1.छात्र पुस्तक पढ़ता है। 2.छात्र ने पुस्तक पढ़ी। 3.थोड़ा जोर से पढो। 4.बच्चा रो रहा है। (2) कर्म वाच्य १.कर्म कि प्रधानता होती हैं। २.केवल सकर्मक क्रिया का हि प्रयोग हो सकता हैं। ३.कर्ता के साथ 'से' या'के द्वार' कारक चिन्हो का प्रयोग होता है। ४.क्रिया जाना रूप में परिवर्ति...