कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार

कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार

कारक /कारक का अर्थ और प्रकार
कारक /कारक का अर्थ और प्रकार

कारक का अर्थः-

कारक का शाब्दिक अर्थ है-क्रिया को सम्पन और निष्पादित करने वाला।
उदाहरणः-
* हरि श्याम को पुस्तक देता है।    (सम्प्रदान कारक)
* हरि को विध्यालय जाना था।     (कर्ता कारक)
* उसने मुझे पिटा।               (कर्म कारक)
* हरि के द्वारा पुस्तक पढी गई।    ( कर्ता कारक)
*पुजारी कुत्तो से डरता है।     (आपादान कारक)
* तुम कहाँ जा रहे हो।        ( कर्ता कारक)

👉संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो वाक्य में प्रयुक्त क्रिया (मुख्यतः) या अन्य पदो के साथ सम्बन्ध सुचित करे कारक कहलाता है।

    अर्थात संज्ञा या सर्वनाम के भिन्न -भिन्न रुप कारक कहे जा सकते है।
जैसेः-

  •          छात्र ने    (उसको)
  •          छात्र को   (उस को)
  •          छात्र से    (उस से)

👉कर्ता के आठ भेद होते है:-


  1.   कर्ता ने
  2.  कर्म को
  3. करण से या के द्वारा
  4. सम्प्रदान के लिए
  5. आपादान से (अलग होने के अर्थ में)
  6. सम्बन्ध का,के,की,या रा,रे,री
  7. अधिकरण मै/पर
  8. सम्बोधन    हे,अरे! या किसी संज्ञा का नाम

👉 जिन संज्ञा या सर्वनाम पदो में कारक चिन्हृ का प्रयोग नहि होता उन्हे शून्य कारक चिन्ह् कहा जाता है।
👉सर्वनाम में सात कारक चिन्ह् होते है सम्बोधन नहि होता ।

1.  कर्ता कारकः- (ने/ के द्वारा/से/को/0)

अर्थः-   कार्य को करने वाला कर्ता होता हैं।
उदाहरणः-
* छात्र ने खाना खाया ।
*उसने खाना खाया।*छात्र के द्वारा पुस्तक पढ़ी गई।* उससे पुस्तक पढ़ी गई।
*मेरे से चला नही गया।
*छात्र को परिक्षा कि तैयारी करनी थी।
*उसे घर जाना था।(0 कारक चीन्ह्)

2.कर्म कारकः-(को/से/0)

           
अर्थः-कर्ता द्वारा जो कार्य किया जाता है।वहा कर्म कारक होता हैं।
उदाहरणः-
*मेंने बच्चो को पढ़ाया।
*मेने उससे कहा।
*मैं पढ़ता हूं।

3.सम्प्रदान कारकः-

 👉यदि वाक्य में देना ,प्रदान करना ,भेंट करना,सोपना आदि क्रियाओ का प्रयोग हो जाये तो ,जिसे दिया जाता हैं।उसमें सम्प्रदान कारक होगा ।(को कारक चिन्ह् सम्प्रदान का होगा।)
👉यदि वाक्य में कहना, नमस्कार करना, या बताना आदि क्रियाओ  का प्रयोग हो जाय।तो जिससे कहा जाता हैं।
उसमे'से' कारक चिन्ह् होने पर भी कर्म कारक होता है जैसे-
       जैसे अध्यापक ने बच्चो से पुछा।👉'क्या'व'किसे'प्रश्न का उत्तर कर्म कहलाता है।
👉यदि किसी वाक्य में दोनो में से किसी एक का हि उत्तर आए तो उसमें कर्म कारक कहलाता है।
जैसे-
 1.राम पुस्तक पढ़ता है।(कर्म)
2.राम उसे चाहता है।(कर्म)
👉यदि किसी वाक्य में  दोनो हि प्रश्नो के उत्तर मिल जाए तो 'क्या'प्रश्न का उत्तर' कर्म ' कारक होता हैं।तथा 'किसे'प्रश्न का उत्तर सम्प्रदान कारक होता है। 
जैसेः-
  1.मैने उसे शशॉल भेंट कि।
👉क्या प्रश्न का उत्तर प्रत्यक्ष या अप्राणि वाचक या प्रधान कर्म कहलाता है।तथा 'किसे' का उत्तर अप्रत्यक्ष या प्राणि वाचक कर्म कहलाता है।
नौटः- समय आने पर अधिकरण कारक होता है।

3.करण कारक(से/के द्वारा)

१.राम ने श्याम को बाण से मारा।
२.उसने नौकर के द्वारा संदेश भेजा।
३.मेने लाठी से शांप को मारा।

4. आपादान कारकः-

    👉 अलग होने के अर्थ में आपादान कारक का प्रयोग होता है।
👉 यदि दो वस्तुएं या (समय अवधि) एक दूसरे से अलग होती है, तो स्थिर वस्तु में आपादान कारक होता है।तथा जो वस्तु अलग हुई हैं, उसमें कर्ता कारक होता है।
जैसेः-
१.हिमालय से गंगा निकलती है।
२.पेड़ से पत्ता गिरता है।

5.सम्बन्ध कारकः-

(का/के/की/रा/रे/री)
👉सम्बन्ध कारक और सम्बोधन में क्रिया से कोई सम्बन्ध नहि होता है।
१.उसके पिता जी बिमार है।
२.राम का पेर टूट गया।
३.मेरा भाई परिक्षा में पास हो गया।

6. अधिकरण कारक:-(में,पर)

 👉अंदर या उपर का अर्थ देने वाले शब्द अधिकरण कारक के होते है।

7.सम्बोधन कारकः-

हे राम! मेंरा क्या होगा।
राम!तुम ढ़ंग से रहो।

नोटः-
अंग से हिन होने पर -करण कारक
* अन्य से हिन होने पर -आपादान कारक
* डरने के भाव में- आपादान
* प्रेम का भाव होने पर -करण
व्यंजन और उनका वर्गीकरण <<<ये भी पढे़

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