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द्विगु समास और कर्मधारय समास और उसके प्रकार/समास/हिन्दी व्याकरण

रचना के आधार पर तत्पुरुष समास के भेद द्विगु समास और कर्मधारय और उसके प्रकार/समास/हिन्दी व्याकरण द्विगु समास "दो गायो का समूह" इसमें से भी दूसरा पद प्रधान होता हैं।येह तत्पुरूषसमास का हि भेद माना जाता है।द्विगु समास में पहला पद संख्यावाची होता है।तथा दोनो पद मिलकर प्रसिद्ध समूह का अर्थ देने वाले होते है। (दोनो पद संख्या वाची नही होने चाहिए) उदाहरण:- समूह समाहार ,वाला या वाली शब्द  का भी प्रयोग होगा। एकांकी =एक अंक वाला इकतारा = एक तार वाला त्रीफला  = तीन फलो का समाहार चतुष्पथ =चार पथो का समाहार पंचवटी = पांच वटो का समूह षड्दर्शन =छह/षट् दर्शनो का समूह नवरात्र  =नो रात्रियो का समूह षट्रस  =  षट रसो का समूह नोट =उपर्युक्त सभी उदाहरण द्विगु समास विकल्प में नही होने पर बहुब्रीहि समास के माने जायेंगे। अन्य उदाहरण चौराहा -   चार राहो का समूह तीराहा-    तीन राहो का समूह चारपाई-   चार पायो का समूह पनसेरी-     पांच सेरो का बाट अठन्नी-    आठ आनो वाली चवन्नी-     चार आनो वाली चोमासा-   चार ...

तत्पुरुष समास के भेद रचना के आधार पर।हिंदी।तत्पुरुष समास

तत्पुरुष समास  (भाग-2) रचना के आधार पर तत्पुरुष समास के चार भेद होते है। 1.नञ तत्पुरुष समास    2.उपपद तत्पुरूष 3.लुप्त पद तत्पुरुष समास   4.अलुक तत्पुरुष समास 1.नञ तत्पुरुष समास जिन शब्दो कि रचना अ, अन ,अन्, ना ,न उपसर्गो से बनी हो वे नञ तत्पुरूष समास के उदाहरण होते है। अज्ञान  = न ज्ञान/ज्ञान नही अनाहुत  =  न बुलाया हुआ अनावश्यक =आवश्यकता नही अनेक = एक नही नालायक  =लायक नही अनजान =जानकार नही नापसंद =   पसंद नही अनपढ़  = पढ़ा हुआ नही नास्तिक =आस्तिक नही अनमेल  =मेल नही नपुंसक  = पुंसक नही अनहोनी =होनी नही 2.उपपद तत्पुरुष समास  जिस सामासिक पद में दूसरा पद पूर्ण या स्वतन्त्र न होकर उप पद हो वह तत्पुरुष समास का उदाहरण होता है। उपपद से तात्पर्य है जिस पद का वाक्य में अकेले का स्वतन्त्र रुप से प्रयोग  न किया  जा सके। जैसेः-  ज, ग ,द ,धि ,प, ज्ञ ,चर ,कर ,भर ,धर जलज (जल में उत्पन होने वाला) जलद  (जल को देने वाला) मधूप   (मधू को पिने वाला) जलचर (जल में विचरण करने वाला) खग ...

तत्पुरुष समास/ समास/ हिंदी

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तत्पुरूष समास तत्पुरूष समास के भेद जिस सामासिक पद में दूसरा पद प्रधान हो वह तत्पुरुष समास होता है।कारको के आधार पर तत्पुरुष समास छः प्रकार के होते हैं। 1.कर्म =    को 2.करण=   से,  के द्वारा 3.सम्प्रदान = के लिए 4.आपादान =  से 5.सम्बन्ध=     का ,के  ,की 6.अधिकरण=   में पर कर्म तत्पुरुष समास समास/ अव्ययीभाव समास जलधारा  =  .जल की धारा विदेशगमन  =  विदेश को गमन स्वर्गप्राप्त  =   स्वर्ग को प्राप्त स्वर्गीय     = स्वर्ग को गया हुआ कटफोडा़  =  काठ को फोड़ने वाला गिरीधर    = गिरी को धारण करने वाला चिड़िमार  =चिड़ि मारने वाला जलेबीचोर  =जलेबी चोरने वाला प्राप्तोदक   =उदक को प्राप्त (गत ,गमन ,तोड़ ,आगत ,आगमन ,फोड़ ,जोड़ ,मार ,धर  , भर , उन्मुख ,प्राप्त ,चुम्बी) करण तत्पुरुष  समास स्वर और व्यजंन तुतसीरचित रेखांकित माधप्रणित मदान्ध धर्मान्ध अंगरहित मुहबोली (रचित ,अंकित ,कृत , आबाद ,युक्त , ग्रस्त ,पीड़ित ) आपादान जन्मांध देशन...

समास। हिन्दी

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समास वह मुझे देखकर लाल पिला  हो गया। उसका लाना पानी इस दूनिया से उठ गया। स्वाई जयसिंह अजानुबाहु थे। आज के समय लेखको कि दाल रोटी पर नही चलती है। संधि-विच्छेद समास=सम्।      +         आस           (नजदिक) +      (बिठाना) * समास  का शाब्दिक अर्थ होता है=संक्षेप *समास का विलोम व्यास होता है, व्यास का अर्थ विस्तार होता है। *दो शब्दो का ऐसा मेल जिसमें संक्षिप्तता भी हो ऐसी प्रक्रिया समास कहलाती है। *दो शब्दो या पदो के मध्य निहित कारक चिन्ह ,विभक्ति या सम्बन्ध वाचक शब्दोदो को हटाकर जो एक शब्द बनता है।या समस्त पद कहलाता है। *किसी भी सामासिक पद को कारक चिह्न् आदि के द्वारा उसके सरल अर्थ के रूप में लिखा जाना समास विग्रह कहलाता है। जैसे-    रसोई घर (सामासिक पद)+रसोई के लिए घर(समास विग्रह) किसी भी सामासिक पद में कम से कम दो पदो का होना आवश्यक है। जैसे    - बच्चे=    बच्चा और बच्ची            पितरो=   माता और पिता *निम्नलिखित म...

सिर दर्द को रोकने के घरेलु उपाय एवं औषधि

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आँख के रोग को दूर करने के उपाय सिर दर्द को रोकने के घरेलु उपाय एवं औषधि सिर दर्द  एक आम बिमारी है। जो कभी भी किसी भी समय किसी को भी हो सकती है। सिर दर्द गर्म तली हुई चिजे खाने और तनाव का कारण आम कारण है। सिर दर्द कि औषधि जानने से पहले यह जानना जरूरी है ,कि सर दर्द क्या है कैसे होता है इसके कारण क्या क्या है। सिर दर्द को रोकने के घरेलु उपाय एवं औषधि सिर दर्द कि औषधि बताने से पहले हम आपको बताते है कि क्या है और किस कारण से होता है ।सिर दर्द कि औषधि जानने से पहले हमारे लिय यह जानना जरुरी है कि सिर दर्द क्या है तभी हम बहतर ईलाज कर सकेगे। सिर दर्द क्या है? आईय जानते है कि सिर दर्द क्या है ,कैसे होता हैं। सिर दर्द इंसान के तंत्रिका तंत्र यानि नरवस सिस्टम और गर्दन से जुड़ी पपरेशानी है। सिर दर्द कई बार आम होता है।लेकिन कभी कभी इतना बढ् जाता हैं कि दिन रात होने लगता हैं। इसके लिय हम दवाईयां भी लेते है जो पेन किलर होती है जो हमारी किडनी पर अटेक करती हैं  इस लिय सिर दर्द के लिय घरेलू उपायो को अपनाया जाना आवश्यक है जिनके कोई साईड इफेक्ट नही होते हैं।  सि...

स्वप्न दोष और उसका इलाज

स्वप्न दोष और उसका इलाज  सोते समय वीर्य के निकल जाने को स्वप्नदोष कहते हैं।, वैसे तो यह शिकायत हर नौजवान को जाती हैं। मगर महिने में एक या दो बार हो जाय तो घबराना नही चाहिए। बल्कि गर्म वस्तु ,तेल ,मसाले,अंडे आदि खाना बन्द कर दे तो यह शिकायत अपने आप दूर हो जाती हैं। स्वप्न दोष और उसका इलाज 1.तख्मकाहु,तुख्मकासीनी, धनिया , अजवाइन ,खुरासानीर, तुख्म खिर , भूखी इसबगोल ,नीलोफर,,कूँजा मिश्रि बराबर वजन लेकर बारिक करके 6-6 ग्राम सुबह शाम ताजे पानी में तीस दिन तक खायें ।रोजाना होने वाला स्वप्नदोष रूक जाता हैं। परहेज गुड़ ,चावल,खटाई,अंडा,शराब,और दूध दवा खाने तक न लें। तुलसी के फायदे एवं गुण 2. तुलसी के बीज4-4ग्राम  पानी से कुछ समय शाम को खाय। आँख के रोग को दूर करने के उपाय 3.बीज बन्द 3ग्राम.पानी से खाने से स्वप्नदोष रूक जाते है। 4.साबल मिश्रि ,मूसली सफेद ,संदल सफेद,इलायची छोटी, जीरा सफेद,सतवार,भूसी इसबगोल सब 10-10ग्राम लेकर बारिक कूटकर छान ले और 6-6ग्राम सुबह शाम को दूध के साथ सेवन करे  धात के लिए है।कूँजा मिश्रि 40 ग्राम मिलायें। 5.इमली के बीज 125ग्राम 400ग्राम ...

स्वर संधि,दीर्ध संधि/हिन्दी/हिन्दी व्याकरण

स्वर संधि संधि विच्छेद स्वरो के परस्पर मेंल में उत्पन ध्वनि विकारो को  स्वर संधि कहते है। स्वरो कि जातियता और  भिन्नता के आधार के आधार पर स्वर संधि के 5उप भेद है 1.दीर्ध स्वर संधि 2.गुण स्वर संधि 3.वृध्दि स्वर संधि 4.यण स्वर संधि 5.अयाधि स्वर संधि स्वर और व्यंजन    हिन्दी में मूलतः 11स्वर माने गए है।इसमें'अ' ,'इ' ,'उ' ,तथा 'ऋ' चार मूल स्वर है। मूल स्वरो को.हृस्व स्वर भी कहा जाता  है। शेष 7स्वर संयूक्त स्वर माने जाते है। स्वर संधि के प्रकार 1.दीर्घ संधि अ/आ/+अ/आ     =आ इ/ई   +इ/ई          =ई उ/ऊ+उ/ऊ           =ऊ   जब दो समान स्वर अथवा एक हि स्वर के दो रूप हृस्व व दीर्ध, मिलते हैं तो दीर्घ स्वर बनता है- अ/आ+अ/आ=    आ पुरुष +अर्थ = पुरूषार्थ परम+अर्थ=    परमार्थ स्व   +अर्थ =स्वार्थ स्व  +अधीन=स्वाधिन पर+  अधीन=पराधीन शास्त्र+अर्थ=शास्त्रास्त्र परम+अणु=परमाणु वेद+ अन्त=वेदान्त अधिक+अंश=अधिकांश गव   +अक्ष=गवाक्ष सुषुप्त+...