समास। हिन्दी
समास
उसका लाना पानी इस दूनिया से उठ गया।
स्वाई जयसिंह अजानुबाहु थे।
आज के समय लेखको कि दाल रोटी पर नही चलती है।
संधि-विच्छेद
समास=सम्। + आस
(नजदिक) + (बिठाना)
*समास का शाब्दिक अर्थ होता है=संक्षेप
*समास का विलोम व्यास होता है, व्यास का अर्थ विस्तार होता है।
*दो शब्दो का ऐसा मेल जिसमें संक्षिप्तता भी हो ऐसी प्रक्रिया समास कहलाती है।
*दो शब्दो या पदो के मध्य निहित कारक चिन्ह ,विभक्ति या सम्बन्ध वाचक शब्दोदो को हटाकर जो एक शब्द बनता है।या समस्त पद कहलाता है।
*किसी भी सामासिक पद को कारक चिह्न् आदि के द्वारा उसके सरल अर्थ के रूप में लिखा जाना समास विग्रह कहलाता है।
जैसे-
रसोई घर (सामासिक पद)+रसोई के लिए घर(समास विग्रह)
किसी भी सामासिक पद में कम से कम दो पदो का होना आवश्यक है।
जैसे - बच्चे= बच्चा और बच्ची
पितरो= माता और पिता
*निम्नलिखित में से सामासिक पद हैः-
(1) रेल मकान (2) ऊँट रेल(3)शिव (4)शिवालय (4)
तत्पुरुष समास
*संधि और समास मेंअंतर
-संधि दो वर्णो का मेल है जबकि समास दो शब्दो का मेंल है।-संधि में ध्वनि विकार उत्पन्न होना आवश्यक है।,जबकि समास में संधि होना आवश्यक नही है। ◆ किस शब्द में संधि व समास दोनो है?
1. नील कण्ठ 2.नील गगन3. नील कमल 4.नीलाम्बर (4)
* मूलतः समास के चार भेद होते हैं -
(पदो कि प्रधानता के आधार पर भी समास के चार भेद होते है:_
(1)अव्यभाव समास(प्रथम पद प्रधान)(2)तत्पुरुष समास(द्वीतीय पद प्रधान)
(3)द्वन्द्व समास (दोनो पद प्रधान)
(4)बहुब्रीहि समास(अन्य पद प्रधान)
*तत्पुरूष समास के दो भेद होते है:-
1.द्विगु समास 2.कर्मधारय प्रधान*हिन्दी में समास के छः भेद होते हैः-
1.अव्ययीभाव समासः-
*उपसर्ग वाले शब्द (ऐसे शब्द जिनका पूर्व पद अव्यय हो)
निम्न लिखित उपसर्गो को छोड़कर
सु, कु, सत्, सम, बद, खुश, दुर, महा, पूर्ण, अध, अर्ध्द, अल्प (कर्म धारय समास के उदाहरण हैं )
* अ, अन, अन्, ना
ये नञ तत्पुरुष के उदाहरण होते है।
हिंदी स्वर और व्यजंन <<<<<ये भी पढे़।
*पर, स्व,, ये तत्पुरूष समास के उदाहरण होते है।स्वर संधि<<<<ये भी पढ़े।
यथा सम्भव= जितना सम्भव हो
यथा शक्ति = शक्ति के अनुसार
यथा योग्य= योग्यता के अनुसार
यथा स्थान = स्थान के अनुसार
यथोचित = जैसा उचित है
यथोपरि = जैसा ऊपर है
यथेष्ट = जैसा इष्ट है
प्रतिदिन= प्रत्यक दिन
प्रतिशत = प्रत्यक सो पर
प्रत्र्यपण = बदले में अर्पण
प्रत्याशा = आशा के बदले आशा
प्रत्योत्तर = उत्तर के बदले.उत्तर
अनुगम = पिछे गमन
अनुसरण = पिछे सरण
अनुकूल = कूल केअनुसार
प्रतिकूल = कूल के विपरित
बेखटके = बिना धड़के के
स्वर संधि
* दूसरा पद अव्यय वाले पद
मृत्युपर्यन्त = मृत्युतकसेवार्थ = सेवा के लिए
आज्ञानुसार। = आज्ञा के अनुसार
ध्यानपूर्वक = ध्यान के अनुसार
मनोकूल =मन के अनुकूल
गंगापार = गंगा के पार
आजन्म = जन्म से लेकर
रचना के आधार पर तत्पुरुष समास के भेद
*पुनरूक्त शब्द
घर-घर= घर के बाद घर
दिनोदिन=दिन के बाद दिन
रातोरात =रात हि रात में
चलाचलि =चलने के बाद चलना
देखादेखी= देखने के बाद देखना
द्विगु समास और कर्मधारय समास.और उसके प्रकार

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