तत्पुरुष समास/ समास/ हिंदी
तत्पुरूष समास
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| तत्पुरूष समास के भेद |
1.कर्म = को
2.करण= से, के द्वारा
3.सम्प्रदान = के लिए
4.आपादान = से
5.सम्बन्ध= का ,के ,की
6.अधिकरण= में पर
कर्म तत्पुरुष समास
समास/ अव्ययीभाव समासजलधारा = .जल की धारा
विदेशगमन = विदेश को गमन
स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
स्वर्गीय = स्वर्ग को गया हुआ
कटफोडा़ = काठ को फोड़ने वाला
गिरीधर = गिरी को धारण करने वाला
चिड़िमार =चिड़ि मारने वाला
जलेबीचोर =जलेबी चोरने वाला
प्राप्तोदक =उदक को प्राप्त
(गत ,गमन ,तोड़ ,आगत ,आगमन ,फोड़ ,जोड़ ,मार ,धर , भर , उन्मुख ,प्राप्त ,चुम्बी)
करण तत्पुरुष समास
स्वर और व्यजंनतुतसीरचित
रेखांकित
माधप्रणित
मदान्ध
धर्मान्ध
अंगरहित
मुहबोली
(रचित ,अंकित ,कृत , आबाद ,युक्त , ग्रस्त ,पीड़ित )
आपादान
जन्मांधदेशनिकाला
सेवानिवृत
पथभ्रष्ट
धनरहित
(भ्रष्ट , निकाला,च्यूत , निवृत)
सम्प्रदान
विध्यालयदेशभक्ति
यज्ञशाला
(घर ,आलय , आगार , आवास ,ग्रहशाला , साल ,मंच ,भूमि ,दक्षिणा)
द्विगु समास और कर्मधारय समास का प्रकारसम्बन्ध
नगरसेठराष्ट्रपति
राष्ट्राध्यक्ष
कानविधायी
वाग्दान
कन्यादान
गोदान
अधिकरण
आत्मनिर्भर
आपबिति
कविपुंगव
मनमोझी
शास्त्रनिष्णात
कविश्रेष्ठ
नरोत्तम
बनवास
कैशल
नोटः- विशेषण में अधिकरण होता हैं।
कविधर्मस्नानागार
*यदि दूसरा पद संज्ञा पद हो तो सम्बन्ध तत्पुरूष होगा।
*यदि दूसरा पद विशेषण हो तो अधिकरण तत्पुरुष होगा।
*पटु ,कुशल ,चतुर ,प्रविण, निष्णात ,आदि के साथ में पर का प्रयोग (अधिकरण तत्पुरुष)
*कोशल, चातुर्य ,प्राणीण्य, पटुता ,इनके साथ का,के,की का प्रयोग होगा।(सम्बन्ध)
दान (का), बलि, वास (मे पर),सभा
अन्नदान =सम्बन्ध
कन्यादान= सम्बन्ध
गोदोन = सम्बन्ध
विद्यादान =सम्बन्ध
परमदान= कर्मधारय
नरबलि= का,के,कि(नर कि बलि)
ब्राम्हणदान = सम्प्रदान
काकबलि = सम्प्रदान
बलिपशु= बलि के लिय पशु(सम्प्रदान)
अज्ञातवास= अधिकरण
छात्रावास= छात्रा के लिए वास
ग्रामवासि =ग्राम का वासि
भारतवासि = भारत का वासि
राजसभा = राजा कि सभा
घुड़दोड़ =घोड़ो कि दोड़
रनिवास =रानियो के लिय वास
वाहनारूढ़ =वाहन पर आरुड़
घुड़सवारि =घोडे़ की सवारि
राज्यसभा =राज्य के लिए सभा
संधि,संधि विच्छेद
स्वर संधि, दीर्ध संधि

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