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शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद/संज्ञा

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शब्दो के भेद/ रूप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्दो के भेद रुप परिवर्तन या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर  शब्दो  के दो  भेद होते है :- 1.विकारी 2.अविकारी 1.विकारीः-           १.   विकारी  शब्द  लिंग वचन,  काल ,  पुरुष  , कारक , आदि के कारण परिवर्तन होते है।यानि विकृत होते हैं। २. विकारी शब्दो का रूप परिवर्तन हो जाता हैं। जैसेः- छात्र, वह, अच्छा, पढ़ना * विकारी शब्दो के चार भेद होते हैं। 1. संज्ञा 2.सर्वनाम 3.विशेषण 4.क्रिया 2. अविकारी शब्द(अव्यय) अविकारी शब्द भिन्न -2 वाक्यों में प्रयुक्त किये जाने परभी अन्य पदो के लिंग ,वचन आदि से विकृत या परिवर्तन नहि होते हैं। जैसेः- दूर, से दूर,और, अरे! *अव्यय चार प्रकार के होते है। 1.क्रिया विशेषण 2.संबंधसुचक 3.समुच्चय सूचक 4.विस्मयादि बोध संज्ञा किसे कहते है? संज्ञा शब्द भेद/संज्ञा (नाम) सम् (उपसर्ग)+ज्ञा(धातु) किसी भी वस्तु के नाम को  संज्ञा  कहा जाता है।और वस्तु वह जो या तो विद्यमान है या फिर जिसके विद...

कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार

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कारक/हिन्दी व्याकरण/कारक का अर्थ और प्रकार कारक /कारक का अर्थ और प्रकार कारक का अर्थः- कारक  का शाब्दिक अर्थ है-क्रिया को सम्पन और निष्पादित करने वाला। उदाहरणः- * हरि श्याम को पुस्तक देता है।    (सम्प्रदान कारक) * हरि को विध्यालय जाना था।     (कर्ता कारक) * उसने मुझे पिटा।               (कर्म कारक) * हरि के द्वारा पुस्तक पढी गई।    ( कर्ता कारक) *पुजारी कुत्तो से डरता है।     (आपादान कारक) * तुम कहाँ जा रहे हो।        ( कर्ता कारक) 👉 संज्ञा या सर्वनाम  का वह रूप जो वाक्य में प्रयुक्त क्रिया (मुख्यतः) या अन्य पदो के साथ सम्बन्ध सुचित करे कारक कहलाता है।     अर्थात संज्ञा या सर्वनाम के भिन्न -भिन्न रुप कारक कहे जा सकते है। जैसेः-          छात्र ने    (उसको)          छात्र को   (उस को)          छात्र से    (उस से) 👉कर्ता के आठ भेद होते है:-...

Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी

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Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी धन तेरस कि कहानी धन तेरस का त्योहार दिवाली आने के एक दिन पूर्व मनाया जाता है ।इस दिन सामान या सोने चाँदी कि चिजे खरीदना साभ माना जाता है।यह कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है।    इस दिन घर में लक्ष्मी का आवास मानते हैं।इस दिन धनवन्तरि वैध्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुय थे।इसलिय धनतेरस कोधनवन्तरी-जयन्ति भी कहते है। Dhan terah ki kahani/धन तेरस कि कहानी धन तेरस कि कहानी एक बार भगवान विष्णु मृत्यु लोक विचरण करने के लिय लक्ष्मी सहित भूमण्डल पर आये थे।कुछ देर बाद भगवान विष्णु लक्ष्मी से बोले में दक्षिण दिशा कि ओर जा रहा हू तुम वहा पर मत देखना।यह कहकर भगवान ने राह पकडी लक्ष्मी उनके पिछे-पिछे चल पड़ी।कुछ हि देर में सरसो का खेत दिखाई दिया,उसके बाद उख का खेत दिखाई दिया।।वही लक्ष्मी जी ने श्रंगार किया और उख तोड़कर चूसने लगी।        उसी क्षण भगवान वहा लोटे यह सब देखकर लक्ष्मी जी को शाप दिया।कि जिस किसान का यह खेत हैतुम यहा१३वर्ष तक नोकरी करोगी।       येसा कहकर भगवान क्ष...

करवा चौथ कि कहानी/kahani/अध्यात्मिक कहानी

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करवा चौथ कि कहानी करवा चोथ कि कहानी गोवर्धन पूजा कि कहानी करवा-चोथ  का व्रत हिन्दूओ का महत्त्व पूर्ण त्योहार है। इस दिन सभी सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति कि लम्बि उम्र के लिय व्रत रखती है ।ये त्योहार भारत के कई राज्यो राजस्थान  ,हरियाणा, पंजाब, गुजरात,उतर प्रदेश आदि राज्यो का महत्वपूण त्योहार है। करवा चोथ कि कहानी   ये व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष को चन्द्रोदयव्यापिनी ४ में किया जाता है। सौभाग्यवति स्त्रियां स्वपति की रक्षार्थ यह व्रत करती हैं। तथा रात्रि को शिव,चन्द्रमा, स्वामि कार्तिकेय आदि के चित्रो एवं सुहाग की वस्तुओं कि पूजा करती हैं।पहले चन्द्रमा उसके नीचे शिव तथा कार्तिके आदिके चित्र पर दीवाल के पीसे एपन से बनाना चा हिए।इस दिन निर्जल व्रत करे ।चन्द्र अर्ध्य देकर भोजन करना चाहिए।कोइ  कोई स्त्रिया चीनी  या मिट्टी का करवा आदान प्रदान करती हैं। कहानी करवा चोथ कि कहानी एक बार पाण्डु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर चले गये ।इधर पाण्डवो पर अनेक विपत्तियाँ पहले से हि व्याप्त थी।इससे द्रौपदी ने शोकाकुल हो कृष्ण का ध्यान किया भगव...

गोवर्धन- पूजा की कहानी/अन्नकुट कि कहानी

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गोवर्धन - पूजा कि कहानी गोवर्धन पर्वत कि कहानी गोवर्धन पर्वत कि कहानी  एक दिन भगवान कृष्ण  ने देखा कि पूरे ब्रज में तरह -तरह के मिष्ठान  तथा पकवान बनाये जा रहे हैं।पूछने पर ज्ञात हुआ कि वृषासुर संहारक ,मेध देवता ,देवराज इन्द्रकी पूजा के लिए तैयारु हो रही हैं।इन्द्र कि प्रसन्नता से हि वर्षा होती हैं। रुप चतुर्दशी कि कहानी <<<ये भी पढ़े। गायो को चारा मिलेगा तथा जिविकोपार्जन कि समस्या हल होगी। गोवर्धन पर्वत कि कहानी      यह सुन कर भगवान ने श्री कृष्ण ने इन्द्र कि निन्दा करते हुए कहा कि उस देवता कि पूजा करनी चाहिए जो प्रत्यक्ष आकर पूजन सामग्री स्विकार करे।यह सुनकर गोपो ने कहा कि कोटी -2 देवताओ के राजा कि इस तरह से निन्दा नही करनी चाहिये।तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि इन्द्र कि क्या शक्ति है जो वर्षा करे हमारी सहायता करे।          पूजा तो उस  गोवर्धन पर्वत  कि पुजा करनी चाहिए जो शक्तिशाली और सुन्दर है जो वर्षा का मूल स्रोत हैं।श्री कृष्ण के वाग्जाल में फंसकर सभी ब्रजवासियो नज घर के अन्दर जाक...

व्यंजन/व्यंजन का वर्गीकरण/अनुस्वार और चन्द्र बिन्दु में अन्तर/अयोगवाह/हिन्दी

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व्यंजन का वर्गीकरण वर्ण-संयोग और स्वर वर्गीकरण व्यंजन वर्गीकरण संधि विच्छेदं 1. व्यंजन  शब्द के उच्चारण में बाधा या अवरोध होने के कारण इन्हे सबाध ध्वनि कहा जाता है. 2.व्यंजनो का उच्चारण स्वरो की सहायता से ही सम्भव है अतः इन्हे स्वतन्त्र ध्वनि नहि कहा जाता है। 3.मूल रुप से 33व्यंजन होते है। 4.हिन्दी वर्ण माला में चार संयुक्त व्यंजन होते हैः-       क्ष, त्र  ,ज्ञ   ,श्र 5.दो नव विकसित ध्वनिया हैः-   ड़  ,ढ़ । 6. पांच आगत व्यंजन   ध्वनियां  हैः-       क़   ,ख़   ,ग़    ,ज़   ,फ़   ये नुकता का निशान है।       व्यंजन वर्गीकरण के दो प्रमुख आधार है:- व्यंजन वर्गीकरण 1.उच्चारण स्थान 2.उच्चारण प्रयत्न    उच्चारण स्थान के आधार पर व्यंजन ध्वनियो का वर्गीकरण १.  कण्ठ्य  -    क्,    ख्,    ग्,    घ्,    ड़्   , २. तालव्य-       च्,    छ्,    ज्,   ...

वर्ण-सयोग/वर्ण का भेद/स्वर वर्गीकरण

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वर्ण- संयोग वर्ण-संयोग/स्वर वर्गीकरण व्यजंन+स्वर अर्थः- व्यजंन में स्वर को मात्रा के रूप में जोड़ना वर्ण-संयोग कहलाता है। जैसे- त्+ऋ=     कृ क्+ए=     के र् +उ =      र्उ र +ऊ=      रू स्+अ =     स    संयुक्त व्यंजनः- दो भिन्न -2 व्यंजनो को मिलाकर लिखना संयुक्त व्यंजन कहलाता है।      इसमें दो व्यंजनो के मध्य स्वर कि बाधा नही होती है।संयुक्त व्यंजन के निम्न लिखित तीन रूप होता है। १.       क्ष         त्र         ज्ञ           श्र २.        द्द         प्र        द्र       द्ध    र्म       क्र       द्व      ट्ठ   ३.द्य       क्व  .  ल्ह     न्ह        ह्न प्रश्न:-    किस शब्द में संयुक्त व्यंजन का प्रय...