Kahaniyan

ईश्वर मे विश्वास

एक समय कि बात कि बात है एक साधू हमेसा खुद के पेर बांध कर उलटा कुँए में खुद को लटकाकर तपश्या करता था
उसका विश्वास था कि जब मेरी रस्सी टूटेगी तो ईश्वर मुझे लेने
आयेगे। गाँव वाले भी उस पर विश्वास करते थे।कई दिन बित गय ।
उसी गाँव का एक आदमी रोज उसे देखताथा ।एक दिन उसका मन भी भगवान  कृष्ण से मिलने का हुआ। वह भी पैर के रस्सी बान्ध कर कुँऐ में उल्टा लटक गया।
उस आदमी कि रस्सी टूट गई।भगवान ने उसे बचा लिया। तब ।उसने भगवान से पूछा कि यह साधू इतने दिनो से आपकी आराधना कर रहा है।आप इसे लेने नही आये ।मुझे इतनी जल्दी मिलने आ गये।
तब भगवान कृष्ण ने कहा कि तुझे रस्सी से ज्यादा मुझ पर विश्वास था। लेकिन इस साधू ने अपने आपको लोहे कि रस्सी से बांद रखा। इसे मुझसे ज्यादा रस्सी पर विश्वास है।
अतः भगवान को पाने के लिय उन पर पूरा विश्वास होना जरूरी है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तत्पुरुष समास के भेद रचना के आधार पर।हिंदी।तत्पुरुष समास

वर्ण-सयोग/वर्ण का भेद/स्वर वर्गीकरण

समास। हिन्दी